Thursday, May 10, 2018

5 Electric Scooters In India With Turbo Charging, Know Features And Mileage – टर्बो चार्जिंग के साथ भारत में मिलने वाले 5 इलेक्ट्रिक स्कूटर, जानें फीचर्स और माइलेज

5 Electric Scooters In India With Turbo Charging, Know Features And Mileage – टर्बो चार्जिंग के साथ भारत में मिलने वाले 5 इलेक्ट्रिक स्कूटर, जानें फीचर्स और माइलेज


भारतीय स्कूटर बाजार निरंतर विकसित हो रहा है, जिसका अर्थ है कि आने वाले समय में इस सेग्मेंट में काफी बढ़त देखी जा सकती है। बाजार में अभी 100-110cc स्कूटर्स को काफी लोकप्रियता हासिल हो रही है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक स्कूटर सेग्मेंट में भी इस साल कई नए मॉडल्स उतारे जा रहे हैं। बैटरी संचालित होने के कारण ये पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक नहीं है। ये इलेक्ट्रिक स्कूटर कितने असरदार होंगे, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन इन इलेक्ट्रिक दुपहिया बनाने वाली कंपनियों का दावा है कि इन स्कूटर्स में पावर और फीचर्स काफी दमदार हैं।

Saturday, April 28, 2018

डीजल कारों की मांग में पिछले छह सालों में दिखी भारी गिरावट, कानूनी बंदिशें बनी सबसे बड़ा कारण

डीजल कारों की मांग में पिछले छह सालों में दिखी भारी गिरावट, कानूनी बंदिशें बनी सबसे बड़ा कारण


डीजल कारों की मांग में पिछले छह सालों में दिखी भारी गिरावट, कानूनी बंदिशें बनी सबसे बड़ा कारण


diesel cars sales drops down by 27 percent in last six years
पांच साल पहले देश में खरीदी जाने वाली हर दूसरी कार डीजल कार होती थी। लेकिन आज यह आंकड़ा गिर कर प्रत्येक चौथी कार तक जा पहुंचा है। यह गिरावट सिर्फ सीडान या कॉम्पैक्ट श्रेणी की कारों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि डीजल कारों में ग्राहकों की पहली पसंद मानी जाने वाली एसयूवी श्रेणी की कारों की बिक्री में भी गिरावट आई है। पिछले पांच सालों में एसयूवी की पेट्रोल कारों की बिक्री में लगभग पांच गुना की वृद्धि हुई है। जहां 2012-13 में पेट्रोल एसयूवी की खरीदारी लगभग 3 प्रतिशत तक सीमित थी, वहीं 2017-18 में बढ़कर 16 प्रतिशत पहुंच गई है।
दिल्ली-एनसीआर में लगा था बैन
पेट्रोल व डीजल कारों की कीमत के बीच घटते फासलों व कई तरह की कानूनी बंदिशों को इसका कारण माना जा रहा है। वर्ष 2016 में दिल्ली-एनसीआर में लगभग आठ महीनों के लिए 2000 सीसी से ज्यादा इंजन वाले डीजल वाहनों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें बैन कर दिया गया था। दिल्ली-एनसीआर में डीजल कारों की वैधता सिर्फ दस सालों की है, जबकि पेट्रोल कारों की वैधता पंद्रह साल की है। 

प्रदूषण के लिए जिम्मेदार
डीजल कारों से पॉर्टिकुलेट मैटर (पीएम) व नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे प्रदूषण फैलाने वाले तत्व भारी मात्रा में निकलते हैं, जिसके कारण कई अन्य प्रदेश भी दिल्ली जैसा कानून लागू करने जा रहे हैं। कई शहरों में तो डीजल टैक्सियां तक प्रतिबंधित हैं।

6 साल में 27 फीसदी की गिरावट    

सियाम के आंकडों के अनुसार डीजल कारों की बिक्री की मात्रा में 2012 से 2018 के बीच लगभग 27 प्रतिशत की गिरावट आई है। डीजल कारों की कीमत पेट्रोल कारों के मुकाबले एक से डेढ़ लाख रुपये ज्यादा है और अगर वर्ष 2020 तक बीएस-6 एमीशन के नियम लागू होते हैं तो डीजल कारों की कीमतों में इजाफा होगा। यानि आने वाले समय में डीजल कारों के लिए यह संकट और गहराएगा।

कंपनियां कर रही हैं बदलाव
कार निर्माता भी इस संकट से बचने के लिए नए-नए तरीके आजमा रहे हैं। भारत में फार्चूनर व इन्नोवा जैसी डीजल कारों की वजह से चर्चित कार निर्माता टोयोटा ने इस संकट को देखते हुए अपनी अगली सिडान यारिस के सिर्फ पेट्रोल मॉडल को भारत में उतारने का फैसला किया है। लग्जरी कारों के निर्माता जैसे जैगुआर, लैंड रोवर, बीएमडब्लू ने भी इस संकट को भापते हुए अपने उत्पादन में पेट्रोल कारों को भी शामिल कर लिया है।

from Latest And Breaking Hindi News Headlines, News In Hindi | अमर उजाला हिंदी न्यूज़ | - Amar Ujala https://ift.tt/2KlZQiX

Popular Posts